Sunday 10 April 2011

तुम रूठ जाया करो

 

तुम रूठ जाया करो,
इस तरहा,
के जैसे,
ज़िंदगी की ख्वाहिश करने वालों से,
ज़िंदगी रूठ जाती है,

मुझे सताया करो,
इस तरहा,
के जैसे,
मौत के तम्मनाई को ज़िंदगी सताती है,

साथ छोड़ जाया करो,
इस तरहा,
के जैसे,
खुश्बू फूल को छोड़ जाती है,

मगर!
जब मेरी ज़ब्त के बंधन टूट जायें तो,
मान जाया करो,
इस तरहा,
के जैसे,
गुनहगार बंदे के आसुओं पे,
”खुदा” मान जाता है

5 Response:

  1. गुनहगार बंदे के आसुओं पे,
    ”खुदा” मान जाता है
    एकदम सही बात , सुन्दर रचना , बधाई

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  2. अच्छे है आपके विचार, ओरो के ब्लॉग को follow करके या कमेन्ट देकर उनका होसला बढाए ....

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  3. बहुत ही सटीक लिखा है अपने अति सुद्नर

    आप मेरे ब्लॉग पे पधारे इस के लिए बहुत बहुत धन्यवाद अपने अपना कीमती वक़्त मेरे लिए निकला इस के लिए आपको बहुत बहुत धन्वाद देना चाहुगा में आपको
    बस शिकायत है तो १ की आप अभी तक मेरे ब्लॉग में सम्लित नहीं हुए और नहीं आपका मुझे सहयोग परत हुआ है जिसका मैं हक दर था
    अब मैं आशा करता हु की आगे मुझे आप शिकायत का मोका नहीं देगे
    आपका मित्र दिनेश पारीक

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