ऐ मेरे दिल किसी से भी शिकवा ना कर, अब बुलंदी पे तेरा सितारा नही,
गैर का ज़िक्र क्या गैर फिर गैर है, जो हमारा था वो भी हमारा नही,
ऐ मेरे हमनशीं चल कही और चल, इस शहर मे अब अपना गुज़ारा नही,
बात होती गुलों तक तो सह लेते हम , अब तो काँटों पे भी हक़ हमारा नही,
दी सदा दार पर और कभी दूर पर किस जगह मैने तुमको पुकारा नही,
ठोकरें यूँ खिलाने से क्या फ़ायदा, साफ कह दो की मिलना गवारा नही,
आज आए हो तुम कल चले जाओगे, ये मोहब्बत को अपनी गवारा नही,
उम्र भर का सहारा बनो तो बनो, दो घड़ी का सहारा-सहारा नही,
गुलिस्ताँ को लहू की ज़रूरत पड़ी, सबसे पहले ही गर्दन हमारी कटी,
फिर भी कहते हैं मुझसे ये अहले चमन, ये चमन हमारा तुम्हारा नही,
ज़ालिमों अपनी किस्मत पे नाजा ना हो, दौर बदलेगा ये वक़्त की बात है,
वो यक़ीनन सुनेगा सदाएं मेरी, क्या तुम्हारा खुदा है हमारा नही,
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Bahut unda gazal kahi hai.
ReplyDeletebahut khoob
ज़ालिमों अपनी किस्मत पे नाजा ना हो, दौर बदलेगा ये वक़्त की बात है,
ReplyDeleteवो यक़ीनन सुनेगा सदाएं मेरी, क्या तुम्हारा खुदा है हमारा नही,
ये शेर बहुत पसंद आया...
http://veenakesur.blogspot.com/